होली भारत का एक प्रमुख और रंगों से भरा हुआ त्योहार है, जिसे हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और प्रेम, भाईचारे व उत्साह का प्रतीक है। होली घूमने के लिए कुछ बेहतरीन जगहें हैं जहाँ आप इस त्योहार का असली मज़ा ले सकते हैं। आपकी पसंद के अनुसार, आप पारंपरिक या सांस्कृतिक वाली जगह चुन सकते हैं। यहाँ कुछ बेहतरीन विकल्प दिए गए हैं :-

होली में घूमने कहाँ जाए ?
बरसाना और नंदगांव (उत्तर प्रदेश) :-
बरसाना होली: अनोखी लट्ठमार होली की परंपरा
बरसाना होली, जिसे लट्ठमार होली भी कहा जाता है, भारत की सबसे अनोखी और प्रसिद्ध होली में से एक है। यह उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित बरसाना गांव में मनाई जाती है। इस होली की खासियत यह है कि महिलाएं पुरुषों को लाठियों (लट्ठ) से मारती हैं, और पुरुष खुद को बचाने की कोशिश करते हैं।
बरसाना होली की खास बातें:
बरसाना होली भारत की सबसे प्रसिद्ध और अनोखी होली में से एक है, जो उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के बरसाना गाँव में मनाई जाती है। यह होली विशेष रूप से “लट्ठमार होली” के नाम से जानी जाती है, जिसमें महिलाएँ पुरुषों को लाठी से मारती हैं, और पुरुष बचने की कोशिश करते हैं।
बरसाना होली का महत्व
बरसाना, श्रीकृष्ण की प्रिय राधा रानी का गाँव माना जाता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने मित्रों के साथ नंदगाँव से बरसाना आते थे और राधा व उनकी सखियों से होली खेलने की शरारत करते थे। तब राधा और उनकी सखियाँ कृष्ण और उनके मित्रों को लाठियों से मारती थीं। यही परंपरा आज भी जीवंत रूप में देखी जाती है।
होली उत्सव का आयोजन
बरसाना होली फाल्गुन मास में होली से कुछ दिन पहले मनाई जाती है। यह उत्सव दो दिनों तक चलता है.
1. पहला दिन नंदगाँव के पुरुष होली खेलने के लिए बरसाना आते हैं। यहाँ राधा की सखियाँ उन पर गुलाल और रंग डालती हैं और लाठी से उन्हें मारने की कोशिश करती हैं।
2. दूसरा दिन बरसाना के पुरुष नंदगाँव जाकर वहाँ होली खेलते हैं, जहाँ नंदगाँव की महिलाएँ उसी तरह उन्हें लाठियों से मारती हैं।
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मथुरा-वृंदावन (उत्तर प्रदेश) :-
मथुरा-वृंदावन की होली
मथुरा-वृंदावन की होली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक दिव्य और अलौकिक उत्सव है, जो प्रेम, भक्ति और रंगों से सराबोर होता है। यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण और राधा की प्रेम लीलाओं से जुड़ा हुआ है और इसे देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहाँ आते हैं।
फूलों की होली (बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन)
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में होली का अनोखा रूप देखने को मिलता है। यहाँ गुलाल और रंगों की जगह फूलों से होली खेली जाती है। जब पुजारी भगवान को फूलों से होली खिलाते हैं, तो मंदिर का पूरा वातावरण भक्तिमय और रंगीन हो जाता है।
रंगभरनी एकादशी (बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन)
होली से पहले आने वाली रंगभरनी एकादशी के दिन, बांके बिहारी जी को पहली बार रंग लगाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु गुलाल उड़ाकर भगवान के साथ होली खेलने का आनंद लेते हैं।
धुलंडी (मथुरा और वृंदावन की सड़कों पर होली)
रंगों से सराबोर धुलंडी के दिन, मथुरा और वृंदावन की गलियों में भक्त और श्रद्धालु एक-दूसरे को रंग लगाते हैं। कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और द्वारकाधीश मंदिर में भव्य आयोजन होते हैं।
होली का समापन – हुरंगा (दाऊजी मंदिर, बलदेव)
मथुरा के बलदेव क्षेत्र में स्थित दाऊजी मंदिर में होली के बाद हुरंगा उत्सव मनाया जाता है, जिसमें महिलाएँ पुरुषों को कोड़े (कपड़े की रस्सी) से मारती हैं और उन पर रंग डालती हैं।
क्यों है मथुरा-वृंदावन की होली खास ?
यह सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि भक्ति और प्रेम का त्योहार है।
भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का सजीव चित्रण देखने को मिलता है।
देश-विदेश से लोग यहाँ आकर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आनंद लेते हैं।
फूलों की होली, लट्ठमार होली, हुरंगा, जैसी विभिन्न अनोखी परंपराएँ इसे और भी खास बनाती हैं।
हम्पी ( कर्नाटक )
हम्पी (कर्नाटक) की होली
हम्पी, जो यूनेस्को द्वारा घोषित विरासत स्थल है, न केवल अपनी ऐतिहासिक वास्तुकला और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ की होली भी बेहद खास होती है। उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत में होली का उत्सव उतनी भव्यता से नहीं मनाया जाता, लेकिन हम्पी की होली एक अपवाद है।
हम्पी की होली का अनोखा अंदाज
हम्पी में होली का जश्न एक अलग ही रंग में रंगा होता है। यहाँ यह त्योहार भारतीयों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों के बीच भी बहुत लोकप्रिय है।
रंगों और संगीत का अद्भुत मेल
हम्पी की गलियों में गुलाल और रंगों की बौछार के साथ होली मनाई जाती है।
स्थानीय लोग और पर्यटक ढोल-नगाड़ों और संगीत के साथ नृत्य करते हैं।
विशेष रूप से विदेशी सैलानी इस अवसर का भरपूर आनंद लेते हैं और भारतीय संस्कृति का हिस्सा बनते हैं।
ऐतिहासिक मंदिरों और खंडहरों के बीच होली
हम्पी के प्रसिद्ध विरुपाक्ष मंदिर और आसपास के ऐतिहासिक स्थलों के पास होली का आयोजन किया जाता है।
पुराने राजमहल और मंदिरों के खंडहरों के बीच रंगों की होली खेलना अपने आप में एक अनोखा अनुभव होता है।
तुंगभद्रा नदी में होली के बाद स्नान
– होली खेलने के बाद लोग पास ही बहने वाली तुंगभद्रा नदी में जाकर स्नान करते हैं।
– यह परंपरा मान्यता के अनुसार खुद को शुद्ध करने का प्रतीक मानी जाती है।
हम्पी की होली क्यों है खास ?
ऐतिहासिक माहौल प्राचीन मंदिरों और खंडहरों के बीच होली खेलना एक अलग अनुभव देता है।
संगीत और नृत्य ढोल-नगाड़ों और संगीत के साथ होली का जश्न मनाया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय रंग भारतीयों के साथ विदेशी सैलानी भी इस उत्सव में पूरी तरह घुलमिल जाते हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य तुंगभद्रा नदी और पहाड़ों के सुंदर नज़ारों के बीच रंगों की होली खेली जाती है।
हरिद्वार और ऋषिकेश
हरिद्वार और ऋषिकेश में होली का भव्य उत्सव
हरिद्वार और ऋषिकेश में होली का पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यहाँ होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का संगम भी होता है।
हरिद्वार में होली उत्सव
हरिद्वार में होली की शुरुआत फागुन माह में होती है, जब मंदिरों और आश्रमों में फाग के गीत*गाए जाते हैं। जैसे-जैसे होली का दिन नज़दीक आता है, वैसे-वैसे गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगती है।
होली की खास परंपराएँ :-
1. गंगा घाटों पर होली
हर की पैड़ी और अन्य प्रमुख घाटों पर भक्तगण फूलों की होली खेलते हैं।
संतो और श्रद्धालुओं द्वारा हरि भजन और कीर्तन का आयोजन होता है।
इस दौरान हरिद्वार के घाटों का माहौल भक्तिमय और रंगीन हो जाता है।
2. होलिका दहन
हरिद्वार में होलिका दहन का विशेष महत्व है।
यहाँ के कई मंदिरों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार होलिका दहन किया जाता है।
पहले के समय में यहाँ गोबर की गुलरी से होलिका दहन किया जाता था, लेकिन अब लोग सूखे मेवों और लकड़ियों का उपयोग करते हैं।
3. पतंजलि योगपीठ में होली
बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ में हर साल फूलों की होली का आयोजन किया जाता है।
इस दौरान यज्ञ, हवन और भजन-कीर्तन होते हैं।
यहाँ देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
4. संतों और अखाड़ों की होली
हरिद्वार में होली के अवसर पर विभिन्न सन्यासी अखाड़े अपने अनुयायियों के साथ होली मनाते हैं।
जूनापीठ, निरंजनी अखाड़ा और महानिर्वाणी अखाड़ामें भव्य आयोजन होते हैं।
यहाँ रंगों के साथ-साथ चंदन, गुलाल और अबीर की होली खेली जाती है।