Nepal Protest: नेपाल में हाल ही में राजशाही की पुनर्स्थापना और देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इन प्रदर्शनों में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया, जिससे देश में राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक तनाव बढ़ गया है।
Nepal Protest: विरोध प्रदर्शन क्यों हुआ?
नेपाल में राजशाही के लिए सड़कों पर उतरे लोग, नेपाल में यह विरोध प्रदर्शन राजशाही की बहाली के लिए बढ़ते आंदोलन से उपजा है। शुक्रवार, 28 मार्च 2025 को काठमांडू में एक विशाल रैली आयोजित की गई, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने नेपाल में राजशाही की बहाली और देश को पुनः हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और रबर की गोलियों का उपयोग किया।
क्यों हुआ विरोध प्रदर्शन?
Nepal Protest कई कारण है जिस वजह से प्रदर्शन हुआ.
राजनीतिक अस्थिरता: 2008 में राजशाही के समाप्त होने के बाद से नेपाल में लगातार राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। पिछले 17 वर्षों में देश में 14 से अधिक सरकारें बनी हैं, जिससे विकास कार्यों में बाधा आई है और जनता में असंतोष बढ़ा है।
आर्थिक चुनौतियाँ: राजनीतिक अस्थिरता के कारण नेपाल की आर्थिक प्रगति प्रभावित हुई है। बेरोजगारी, महंगाई और गरीबी जैसी समस्याओं ने जनता को निराश किया है, जिससे वे वर्तमान शासन प्रणाली से असंतुष्ट हैं।
धार्मिक पहचान: नेपाल की जनता में यह भावना बढ़ रही है कि देश की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान कमजोर हो रही है। इसलिए, वे नेपाल को पुनः हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
पूर्व राजा का समर्थन: पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने हाल ही में जनता से समर्थन की अपील की, जिससे राजशाही की बहाली की मांग को और बल मिला है।
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Nepal Protest पे क्या है सरकार की प्रतिक्रिया?
सरकार ने इन विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए कर्फ्यू लगाया और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी। पुलिस ने हिंसक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में 105 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। सरकार का कहना है कि वह स्थिति की जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।
Nepal Protest में चल रहे ये विरोध प्रदर्शन देश की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों को उजागर करते हैं। जनता की बढ़ती असंतोष और राजशाही की बहाली की मांग को समझने के लिए सरकार को इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना होगा। साथ ही, देश में स्थिरता और विकास सुनिश्चित करने के लिए सभी पक्षों के साथ संवाद और सहयोग आवश्यक है।
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